वक्त बेवजह तुम यूं बदला ना करो

वक्त बे वजह तुम यु बदला ना करो

वक्त बे वजह तुम यु बदला ना करो |

हमें गमों का इस कदर झांसा दिया ना करो ||

जिंदगी खूबसूरत सी है इससे घबराया ना करो

अपने हालातों को औरों से अलग बतलाया ना करो

इंसान है मौजूद आज भी हर शख्स में …×2

इस इंसानियत की यूं सरेआम तोहीन किया ना करो

वक्त बे वजह तुम यु बदला ना करो |

हमें गमों का इस कदर झांसा दिया ना करो ||
आंखों की नमी और चमक में ये जिंदगी है बसी
इनकी यूं ही सिर्फ वकालत किया ना करो
चेहरे के हाव-भाव रंगों से… ×2
इंसान की औकात का अंदाज लगाया ना करो

वक्त बे वजह तुम यु बदला ना करो |

हमें गमों का इस कदर झांसा दिया ना करो ||

इंसान की भावनाओं को समझा करो

इस झूठ के आवरण से इंसान को परखा ना करो

जज्बात तो है इस रूह में … ×2

उसको भी कभी टटोला करो

वक्त बे वजह तुम यु बदला ना करो |

हमें गमों का इस कदर झांसा दिया ना करो ||

…. . वक्त बेवजह तू बदला ना करो

……. By sonu mahar

जब होती है ये दरियाएँ है  इन हवाओं में – A short poem

जब होती है ये दरियाएँ है इन हवाओं में |

तो लहराती है ये हवाएं चारों दिशाओं में ||

जब देखा हमने उस और तो मिल जाए लक्ष्य इस जहां में

यूं ही ढूंढता रहता था मैं उसे इन निगाहों में

जब देखा उस और तो मिल गया वो मुझे इस जहां में
हां मिल गया वो मुझे इस जहां में

जब मिल गया वो मुझे इन नजरों में

तो महक उठा मेरा यह सारा जीवन उन यादों में

अब दरिया को पार कर मिल गई वो जिंदगी

हां उसके के प्यार से मिल गई मुझे वो जिंदगी

क्योंकि वो मेरा सपना था इस जहां में

जब होती है ये दरियाएँ है इन हवाओं में |

तो लहराती है ये हवाएं चारों दिशाओं में ||

Hindi love song – aao na, aoo na…

आओ ना, आओ ना

थोड़ा पास मेरे तुम आओ न

आओ ना, आओ ना

थोड़ा पास मेरे तुम आओ ना

जाओ ना, जाओ ना

थोड़ा दूर ना मुझसे तुम जाओ ना

सच कहता हूं मैं तुमसे

कुछ ऐसा – वैसा ना करूंगा
बिना तेरी इजाजत के तुझको कभी ना छुऊंगा
मगर है ये गुजारिश तुमसे
इस आशिक की थोड़ी तो इच्छा पूरी कर दो ना
अब और इसे इतना तड़पाओ ना

आओ ना, आओ ना

जरा पास मेरे, हां थोड़ा पास मेरे तुम आओ ना

जाओ ना, जाओ ना

थोड़ा दूर ना मुझसे तुम जाओ ना

हैं ये वादा मेरा तुमसे
कभी ना करूंगा दूर मैं तुमको खुद से
कहता हूं मैं तुमको यह दिल से
दूरी बनाऊंगा ना कभी मैं फिर से
मगर है ये गुजारिश तुमसे

एक बार तो तुम संग मेरे सपनों में खो जाओ ना

अब और इतना शरमाओ ना


आओ ना, आओ ना

जरा पास मेरे, हां थोड़ा पास मेरे तुम आओ ना
जाओ ना , जाओ ना
थोड़ा दूर ना मुझसे तुम जाओ ना

Must read a love song:

Clik on the video play this love stetues :

Who is vilma rudolph – जानिए हिंदी में

दोस्तों ” YARALOVE BLOG” पर आप सभी का स्वागत है |

आज मैं आपको ” MOTIVATIONAL STORIES “सीरीज की दूसरे नंबर की कहानी से रुबरु कराने जा रहा हूं जो A person real life’s story पर आधारित है |

यह एक 1940 दशक की अमेरिका Athletic की कहानी है , जिसने अपने गरीबी जीवन में किस प्रकार संघर्ष करते हुए नई ऊंचाइयों को छुआ और 1960 Italy, Olympics में ट्रैक और फील्ड में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रथम अमेरिका महिला बनी|

“Motivational stories “सीरीज की प्रथम कहानी एक ऐसे छात्र की कहानियां जो आत्महत्या जैसे घिनौने कदम को मात देकर अपने सपनों को सच करके दिखाता है|

इसे पढ़ने के लिए इस कहानी के अंत में लिंक दिया हुआ है वहां क्लिक करें ……

https://www.yaralove.xyz/motivational-story

Vilma rudolf

Athlete, Track and Field Athlete (1940–1994)

इस बात में किसी प्रकार का संदेह नहीं है कि वर्तमान समय में हर क्षेत्र में महिलाएं भी पुरुषों के साथ साथ नई ऊंचाइयों को छू रही है चाहे वो कोई सा भी क्षेत्र (चिकित्सा, विज्ञान, राजनीति, खेल आदि ) हो जहां तक खेल कि बात की जाए तो आज हर प्रकार के खेल में पुरुषों के साथ-साथ है बल्कि 2018 रियो ओलंपिक खेलों में भारत की महिलाएं पुरुषों से अधिक पदक जीती थी, पर क्या खेलों में महिलाओं की यह स्थिति 1960 के दशक में भी सही थी |

यह कहानी है उस लड़की की जिसे ढाई साल की उम्र में पोलियो हुआ, जो 11 साल की उम्र तक बिना ब्रेस के चल नहीं पाई पर जिसने 21 साल की उम्र में 1960 के ओलम्पिक में दौड़ में 3 गोल्ड मैडल जीते…..

यह कहानी है उस लड़की की जिसका जन्म एक अश्वेत परिवार में हुआ (तब अमेरिका में अश्वेतों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता था), पर जिसके सम्मान में आयोजित भोज समारोह में, पहली बार अमेरिका में, श्वेतो और अश्वेतों ने एक साथ हिस्सा लिया….

विल्मा रुडोल्फ कौन थी?

विल्मा ग्लोडियन रूडोल्फ (23 जून, 1940 – 12 नवंबर, 1994) सेंट बेथलेहम, टेनेसी में पैदा हुई धावक थी, जो 1956 में अपने खेल के बाद ट्रैक और फील्ड में एक विश्व-रिकॉर्ड ओलंपिक चैंपियन और अंतरराष्ट्रीय खेल आइकन बन गई थी । रूडोल्फ ने 200 मीटर की दौड़ में भाग लिया और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में 1956 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 4 × 100 मीटर रिले में कांस्य पदक जीता। उसने 100 स्वर्ण और 200 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धाओं में और रोम , इटली में 1960 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 4 x 100 मीटर रिले में तीन स्वर्ण पदक जीते। रूडोल्फ को 1960 के दशक में दुनिया की सबसे तेज महिला के रूप में सराहा गया और वह एक एकल ओलंपिक खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली अमेरिकी महिला बनीं।

1960 के दशक की शुरुआत में एक ओलंपिक चैंपियन के रूप में अमेरिका और विदेशों में सबसे अधिक दिखाई देने वाली अश्वेत महिला थी| वह अश्वेत और महिला एथलीटों के लिए एक रोल मॉडल बन गईं और उनकी ओलंपिक सफलताओं ने संयुक्त राज्य में महिलाओं के ट्रैक और फील्ड को ऊंचा करने में मदद की। रूडोल्फ को नागरिक अधिकारों और महिलाओं के अधिकारों के अग्रणी के रूप में भी माना जाता है। 1962 में रुडोल्फ 100- और 200-मीटर व्यक्तिगत स्पर्धाओं और 4 × 100-मीटर रिले में विश्व रिकॉर्ड धारक के रूप में अपने एथलेटिक करियर की पहचान बनाई। रूडोल्फ और उनकी उपलब्धियों को कई प्रकार की श्रद्धांजलि में याद किया जाता है, जिसमें एक अमेरिकी डाक टिकट, वृत्तचित्र फिल्में, और एक निर्मित टेलीविजन फिल्म, साथ ही साथ कई प्रकाशनों, विशेष रूप से युवा पाठकों के लिए किताबें शामिल हैं|

प्रारंभिक जीवन

विल्मा का जन्म 1939 में अमेरिका के टेनेसी राज्य के एक कस्बे में हुआ। विल्मा के पिता रुडोल्फ कुली व माँ सर्वेंट का काम करती थी। विल्मा 22 भाई – बहनों में 19 वे नंबर की थी। विल्मा बचपन से ही बेहद बीमार रहती थी, ढाई साल की उम्र में उसे पोलियो हो गया। उसे अपने पेरों को हिलाने में भी बहुत दर्द होने लगा। बेटी की ऐसी हालत देख कर, माँ ने बेटी को सँभालने के लिए अपना काम छोड़ दिया और उसका इलाज़ शुरू कराया। माँ सप्ताह में दो बार उसे, अपने कस्बे से 50 मील दूर स्तिथ हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर जाती, क्योकि वो ही सबसे नजदीकी हॉस्पिटल था जहा अश्वेतों के इलाज की सुविधा थी। बाकी के पांच दिन घर में उसका इलाज़ किया जाता। विल्मा का मनोबल बना रहे इसलिए माँ ने उसका प्रवेश एक विधालय में करा दिया। माँ उसे हमेशा अपने आपको बेहतर समझने के लिए प्रेरित करती।

पांच साल तक इलाज़ चलने के बाद विल्मा की हालत में थोडा सुधर हुआ। अब वो एक पाँव में ऊँचे ऐड़ी के जूते पहन कर खेलने लगी। डॉक्टर ने उसे बास्केट्बाल खेलने की सलाह दी। विल्मा का इलाज कर रहे डॉक्टर के. एमवे. ने कहा था की विल्मा कभी भी बिना ब्रेस के नहीं चल पाएगी। पर माँ के समर्पण और विल्मा की लगन के कारण, विल्मा ने 11 साल की उम्र में अपने ब्रेस उतारकर पहली बार बास्केट्बाल खेली।

यह उनका इलाज कर रहे डॉक्टर के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। जब यह बात डॉक्टर के. एम्वे. को पता चली तो वो उससे मिलने आये। उन्होंने उससे ब्रेस उतारकर दौड़ने को कहा। विल्मा ने फटाफट ब्रेस उतारा और चलने लगी। कुछ फीट चलने के बाद वो दौड़ी और गिर पड़ी। डॉक्टर एम्वे. उठे और किलकारी मारते हुए विल्मा के पास पहुचे। उन्होंने विल्मा को उठाकर सीने से लगाया और कहा शाबाश बेटी। मेरा कहा गलत हुआ, पर मेरी साध पूरी हुई। तुम दौडोगी, खूब दौडोगी और सबको पीछे छोड़ दौगी। विल्मा ने आगे चलकर एक इंटरव्यू में कहा था की डॉक्टर एम्वे. की उस शाबाशी ने जैसे एक चट्टान तोड़ दी और वहां से एक उर्जा की धारा बह उठी। मेनें सोच लिया की मुझे संसार की सबसे तेज धावक बनना है।

इसके बाद विल्मा की माँ ने उसके लिए एक कोच का इंतजाम किया। विल्मा की लगन और संकल्प को देखकर स्कुल ने भी उसका पूरा सहयोग किया। विल्मा पुरे जोश और लग्न के साथ अभ्यास करने लगी। विल्मा ने 1953 में पहली बार अंतर्विधालीय दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में वो आखरी स्थान पर रही। विल्मा ने अपना आत्मविश्वास कम नहीं होने दिया उसने पुरे जोर – शोर से अपना अभ्यास जारी रखा। आखिरकार आठ असफलताओं के बाद नौवी प्रतियोगिता में उसे जीत नसीब हुई।

अग्रणी ओलंपिक पदक विजेता

अपनी प्रसिद्ध गति के लिए उपनाम “स्केटर”, विल्मा रुडोल्फ ने मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में 1956 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई किया। 16 साल की उम्र में अमेरिकी ट्रैक एंड फील्ड टीम की सबसे कम उम्र की सदस्य, उसने 400 मीटर रिले में कांस्य पदक जीता। हाई स्कूल खत्म करने के बाद, रूडोल्फ ने टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया, जहां उन्होंने शिक्षा का अध्ययन किया। अगले ओलंपिक के लिए उसने कड़ी मेहनत भी की।

रोम, इटली में आयोजित, 1960 ओलंपिक खेल रूडोल्फ के लिए एक सुनहरा समय था। 100 मीटर के सेमीफाइनल में 11.3 सेकंड के अपने समय के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद, उसने फाइनल में 11.0 सेकंड के अपने हवा वाले निशान के साथ प्रतियोगिता जीती। इसी तरह, रूडोल्फ ने 24.0 सेकंड के अपने समय के साथ एक और स्वर्ण पदक का दावा करने से पहले हीट में 200 मीटर के डैश (23.2 सेकंड) में ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ दिया। वह उस अमेरिकी टीम का भी हिस्सा थीं जिसने 44.5 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीतने से पहले 400 मीटर रिले (44.4 सेकंड) में विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया था। नतीजतन, रूडोल्फ एकल ओलंपिक खेलों में ट्रैक एंड फील्ड में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली अमेरिकी महिला बनीं। प्रथम श्रेणी के धावक तुरंत रोम खेलों के सबसे लोकप्रिय एथलीटों में से एक बन गए और साथ ही एक अंतरराष्ट्रीय सुपरस्टार ने अपनी शानदार उपलब्धियों के लिए दुनिया भर में सराहना की।

खेलों के बाद, रूडोल्फ ने टेलीविज़न पर कई प्रदर्शन किए और कई सम्मान प्राप्त किए, जिसमें 1960 और 1961 दोनों में एसोसिएटेड प्रेस फीमेल एथलीट ऑफ द ईयर अवार्ड शामिल थे। वह लंबे समय तक प्रतियोगिता से सेवानिवृत्त नहीं हुईं, और एक समुदाय को पढ़ाने, कोच बनाने और चलाने के लिए चली गईं। केंद्र, अन्य प्रयासों के बीच, हालांकि ओलंपिक ट्रैक पर उसकी उपलब्धियों ने उसे सबसे अच्छी तरह से जाना।

जीवन के अंतिम वर्ष

रूडोल्फ ने 1977 की अपनी आत्मकथा, विल्मा के साथ अपनी उल्लेखनीय कहानी साझा की, जिसे उस वर्ष बाद में एक टीवी फिल्म में बदल दिया गया। 1980 के दशक में, उन्हें अमेरिकी ओलंपिक हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया और शौकिया एथलेटिक्स को बढ़ावा देने के लिए विल्मा रूडोल्फ फाउंडेशन की स्थापना की। ब्रेन कैंसर से लड़ाई हारने के बाद 12 नवंबर, 1994 को ब्रेंटवुड, टेनेसी में उनकी मृत्यु हो गई।

रुडोल्फ को ट्रैक में सबसे तेज महिलाओं में से एक के रूप में याद किया जाता है और एथलीटों की पीढ़ियों के लिए महान प्रेरणा का स्रोत है। उसने एक बार कहा था, “जीतना बहुत अच्छा है, यकीन है, लेकिन अगर आप वास्तव में जीवन में कुछ करने जा रहे हैं, तो रहस्य यह है कि कैसे हारना है। हर समय कोई भी अपराजित नहीं रहता है। यदि आप एक कुचल हार के बाद उठा सकते हैं, और जा सकते हैं। फिर से जीतने के लिए, आप किसी दिन चैंपियन बनने जा रहे हैं। ” 2004 में, यूनाइटेड स्टेट्स पोस्टल सर्विस ने 23-प्रतिशत स्टैम्प पर अपनी समानता की विशेषता दिखाते हुए ओलंपिक चैंपियन को सम्मानित किया।

Wilma_Rudolph1960 olampnic Rome, Italy का लाइव वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें:-https://www.biography.com/video/wilma-rudolph-mini-biography-208646211889

दोस्तों विल्मा रुडोल्फ के जीवन की कहानी आपको कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स बताएं और यदि आप किसी महान व्यक्ति के बारे में जानना चाहते हैं जिसका नाम आप ने सुना हो तो कृपया हमारे कमेंट बॉक्स में उसका नाम बताएं हम आपको उसके जीवन के बारे में बताने की कोशिश करेंगे |

धन्यवाद

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DESH BHAKTI POEM – ओ मेरे देशवासियों, भारत के निवासियों

ओ मेरे देशवासियों, भारत के निवासियों

JAY HIND, JAY BHARAT

JAY HIND, JAY BHARAT

ओ मेरे देशवासियों,

भारत के निवासियों

आओ जरा आज याद करें अपने वीरों की शहादत को ,

इस देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने कि उनकी इस आदत को…

जो कभी यह सोचते नहीं हमें चाहिए किस बात का सुकून हैं,

हां वे तो सोचते हैं हम मे तो बस भारत मां की सेवा का जुनून है |
जो भी हो हम तो इस देश के लिए अपना बलिदान दे देंगे,
चाहे कोई कहे या ना कहे हम तो भारत देश को हर इंतिहान दे देंगे ||
आओ जरा याद करें भारत मां के ऐसे सपूतों को

ओ मेरे देशवासियों,

भारत के निवासियों
आओ जरा याद करें अपने वीरों की शहादत को
इस देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने कि उनकी इस आदत को….

जो हमेशा बतलाते इस देश को अपना है,

हां वे तो कहते बस भारत मां की सेवा ही हमारा सपना है|

जो भी हो हम तो इस देश के लिए अपना ईमान दे देंगे,

चाहे कोई कहे या ना कहे हम तो भारत मां को हर सम्मान दे देंगे ||

आओ जरा याद करें उनकी इन कुर्बानियां को

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ओ मेरे देशवासियों,

भारत के निवासियों

आओ जरा याद करें अपने वीरों की शहादत को ,

इस देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने की उनकी इस आदत को…

. …. By sonu mahar

Desh bhakti poem

JAY HIND, JAY BHARAT

ओ मेरे देशवासियों,

भारत के निवासियों

आओ जरा आज याद करें अपने वीरों की शहादत को ,

इस देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने कि उनकी इस आदत को…

जो कभी यह सोचते नहीं हमें चाहिए किस बात का सुकून हैं,

हां वे तो सोचते हैं हम मैं तो बस भारत मां की सेवा का जुनून है |

जो भी हो हम तो इस देश के लिए अपना बलिदान दे देंगे,

चाहे कोई कहे या ना कहे हम तो भारत देश को हर इंतिहान दे देंगे ||

आओ जरा याद करें भारत मां के ऐसे सपूतों को

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ओ मेरे देशवासियों,

भारत के निवासियों

आओ जरा याद करें अपने वीरों की शहादत को

इस देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने कि उनकी इस आदत को….

जो हमेशा बतलाते इस देश को अपना है,

हां वे तो कहते बस भारत मां की सेवा ही हमारा सपना है|

जो भी हो हम तो इस देश के लिए अपना ईमान दे देंगे,

चाहे कोई कहे या ना कहे हम तो भारत मां को हर सम्मान दे देंगे ||

आओ जरा याद करें उनकी इन कुर्बानियां को

ओ मेरे देशवासियों,

भारत के निवासियों

आओ जरा याद करें अपने वीरों की शहादत को ,

इस देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने की उनकी इस आदत को…

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THE LOVE STORY – priya & priyanshu ki love story

किस्मत से प्रियांश भी उसी के सेक्शन में था और वह पहले कभी कभी कॉलेज आता था लेकिन आजकल वह रोज कॉलेज आने लगा है क्योंकि उसे देखने के बाद…..

वो कोयल की तरह कूहकती थी, पर मैना की तरह प्यारी थी। वो सरसों के खेतों में उड़ती तितली सरीखी थी। वो बरगद के पेड़ों तले मिलने वाले सुकून थी। वो एक लड़की थी। जो 1st year में पढ़ती थी। वो छोटे से शहर के छोटे से गांव में रहती थी, पर अब वह कॉलेज की पढ़ाई करने जयपुर आ गई थी थी। उसी कॉलेज में जयपुर शहर का एक लड़का (प्रियांशु) पढ़ता था | उसने जब उसे पहली दफे देखा था, तो सुर्ख गुलाब की मानिंद होठों की लाली ने उसे आकर्षित किया था। वो लाल रंग की रेशमी फ्रॉकनुमा कपड़े पहनी थी। होठों पर प्यारी सी मुस्कान थी। बालों में मेंहदी का रंग उसके सुर्ख गुलाबी गालों पर पड़कर इंद्रधनुषी छटा बिखेर रही थी। वो अपनी सहेलियों के संग हंसती-खिलखिलाती बातें कर रही थी और बीच में उसके होठों पर जोर से उन्मुक्त हंसी आ जाती थी। तब उसकी आंखें शर्म से इधर उधर देखती थी, कि कहीं किसी ने देख तो नहीं लिया।

उसका नाम प्रिया था। लड़के को नहीं पता था की वह गांव से है या शहर से, बस वह तो उसको एक बार देखने पर ही मोहित हो गया |।इंटर कॉलेज में दो ब्लॉक्स थे, नॉर्थ और सॉउथ। नॉर्थ ब्लॉक लड़कियों के लिए था, सॉउथ ब्लॉक लड़कों के लिए। वो नॉर्थ ब्लॉक की होकर भी सॉउथ ब्लॉक में घूमती रहती थी। हर लड़की की जुबान पर, हर लड़के के दिलों पर वो राज करती थी। पर वह किसी की तरफ भी नजर उठाकर नहीं देखती थी।

हां, वो प्रिया ही थी, जिसे प्रियांशु ने भी देखा तो बस देखता रह गया। इससे पहले तमाम जिंदगियां जी चुका था प्रियांशु। फिर भी उसकी तरफ आकर्षित हुआ। प्रियांशु की जिंदगी थोड़ी अव्यवस्थित थी, पर इतनी भी नहीं,। पर प्रिया से मिलने के बाद उसकी जिंदगी वाकई बदल गई।

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किस्मत से प्रियांशु भी उसी के सेक्शन में था |वह पहले कभी कभी कॉलेज जाता था लेकिन अब वह रोज आता है। पढ़ाई के मामले में फ्रंट वेंचर था, पर था तो औसत ही। हां, प्रिया से मिलने के बाद साइड वेंचर हो गया था। उसे रोज देखना शगल बन गई थी। सुबह कॉलेज में उसे न देखता तो बेचैनी होती थी। इसी फिराक में, कि उसकी एक झलक मिल जाए। कई बार उसके घर के सामने से रॉउंड भी मार दिया करता था। सिर्फ उससे बात करने के लिए प्रियांशु अब दोस्तों को छोड़कर अकेला रहने लगा था । ताकि अकेले में उसे देख पाए और उससेेे बात कर सके | उससे बात करने का मौका मिला। एक दिन यूं ही कॉलेज के गेट पर दिख गई। मैंने कहा-हाय!

वो रुकी, स्माइल दी और नॉर्थ ब्लॉक की तरफ चली गई। कुछ नहीं कहा। पर पहली बार उसकी आंखों से आंखे मिलाने का अजब ही नशा चढ़ गया था। वो अब लड़के को परेशान करने लगी थी। सच कहूं, तो पहला अहसास था। जो सबसे अलग था। जो सबसे जुदा था। अब वो प्रियांशु के लिए बेहद खास थी। पर दूसरी तरफ से ऐसा कुछ भी नहीं था। प्रियांशु बस उसे देखता था। उसकी बातों को सुनता था। उसकी शरारतों में जीता था। उसे घर जाते हुए तबतक देखता था, जबतक वो आंखों से ओझल नहीं हो जाती थी।

एक दिन यूं ही कोई बात चली। ये वो दौर शुरू हो चुका था, जब प्रियांशु शायरी और गजल करने लगा था । उसे प्रेमगीत प्यारे लगने लगे थे। प्रेम कहानियां अच्छी लगने लगी थीं। जबकि इससे पहले उसे प्यार के नाम से ही भिनक उठता था। पर वो ऐसा दौर था, जिसमें प्रियांशु बदलने लगा था। कुछ दिनों बाद बदकिस्मती से प्रियांशु के पापा का ट्रांसफर हो गया और उसे यह जयपुर शहर छोड़ कर जाना पड़ा| उसके बाद में प्रियांशु खोया खोया रहने लगा और प्रियांशु ने अपनी इस प्रेम कहानी को एक पन्ने पर लिखा जो इस प्रकार है :-

यह भी पढ़ें:a heart breakup song https://yaralove7.blogspot.com/2019/01/a-sad-song.html

“मैं सच कहूं, तो पहले जैसा। समय बदल चुका है, फिर भी वो खास है। खास ही रहेगी। पर सुना है कि अब वो पहले जैसी नहीं रही। अब वो शर्माती नहीं। अब वो किसी को देखकर बचने की कोशिश नहीं करती। सुना है, वो अब पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो चली है। लोग अबतक हम दोनों के बारे में तमाम कहानियां किस्से सुनाते रहे हैं। सच कहूं, तो मुझे उसका नाम अपने साथ जुड़े देखकर हैरानी नहीं होती, बल्कि अच्छा लगता था। नाम आज भी जुड़ता है। पर सच कहूं, तो उससे मिले जमाने हो गए। शायद दशक भर का समय। वो आज भी वैसे ही मुस्कराती होगी। वो आज भी वैसे ही ठिठोली करती होगी। वो आज भी वैसे ही खुश होगी। जैसा मैं उसे देखा करता था। जैसा मैं चाहता था। वो हमेशा खुश रहे। अब तो दशक भर का समय हो गया है। सुना है, अब वो पहले से भी ज्यादा चंचल हो गई है। गुदगुदी होती है। पर… अब मैं बदल चुका हूं। अहसास ही बाकी बचे हैं मुझमें। अब मैं पहले से भी ज्यादा गुस्से वाला हो गया हूं। अब मैं किसी की परवाह नहीं करता। “अब मैं…

चलिए, ये गाना डेडीकेटेड है प्रियांश और प्रिया के लिए

दोस्तों यदि आपको प्रिया और प्रियांशु की यह कहानी पसंद आई तो प्लीज लाइक करें और शेयर करें और आप ने भी यदि कभी किसी से प्यार किया है तो आप अपने आप की अपनी प्रेम कहानी हमारी कमेंट बॉक्स में शेयर करें हम आपकी इस प्रेम कहानी को इस दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे धन्यवाद…….

must read for a love song

A SUCCESSFUL STUDENT – who come-back from a sucide

एक दिन ayush अपने आप से नफरत करने लगा, सोचने लगा कि मैंने जिंदगी में अभी तक कुछ नहीं किया और अपनी जिंदगी को समाप्त करने के बारे में विचार करने लगा लेकिन एक पल के लिए वह रुका……..

Student’s depression

आज से कुछ दिन पहले मैंने जैसे ही सुबह न्यूजपेपर उठाया तो उसके मेन पृष्ठ पर लिखा हुआ था , अलवर में बेरोजगारी से परेशान होकर 4 छात्रों ने दी जान | ऐसी खबरें न्यूज़ पेपर में कई बार देखने को मिलती है की एक छात्र ने पढ़ाई से परेशान होकर या बेरोजगारी से परेशान होकर आत्महत्या करना जैसा घिनौना कदम उठाया | पर मेरी नजरों में वे लोग बेरोजगारी से परेशान होकर आत्महत्या नहीं कर रहे बल्कि पढ़ाई से परेशान होकर या जिंदगी में कुछ नहीं कर पाने के कारण और सिर्फ और सिर्फ आत्महत्या करने जैसे नकारात्मक विचार रखने के कारण ऐसा करते हैं| वे सोचते कि हम जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएंगे पर उनका ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है | यदि वे सिर्फ और सिर्फ यह सकारात्मक विचार रखें तो मैं मानता हूं कि वे कभी भी आत्महत्या करने जैसा कदम नहीं उठाएंगे |वे सिर्फ इतना सोच ले कि हम एक युवा है , देश का भविष्य है और हम बहुत कुछ कर सकते हैं फिर क्यों आत्महत्या करें क्या पढ़ाई के अलावा हम जिंदगी में और कुछ नहीं कर सकते, हां हम बहुत कुछ कर सकते है | मुझे विश्वास है यदि हम मन में सकारात्मक विचार रखें तो जिंदगी में बहुत आगे बढ़ सकते हैं

मैं आपको एक ऐसे छात्र के बारे में बताता हूं , जिसने सिर्फ सकारात्मक विचार रखने के कारण इस आत्महत्या जैसे घिनौना अपराध अपराध करने से खुद को बचाया| हां यह कहानी है 25 वर्षीय छात्र ayush की जो जो पढ़ने में अच्छा था फिर भी उसकी जॉब नहीं लग पा रही थी |लोग उसकी आलोचना करने लगे कि इतना बड़ा हो गया और अभी तक नौकरी नहीं लग रही | उसके घर वाले भी उसे इस तरह के ताना देने लगे तो एक दिन Ayush खुद से नफरत करने लगा और उसके मन में भी आत्महत्या करने जैसे नेगेटिव विचार आने लगे |वह अपने आप से नफरत करने लगा सोचने लगा कि मैं जिंदगी में अभी तक कुछ नहीं कर पाया और जिंदगी को समाप्त करने के बारे में विचार करने लगा और अपने कमरे में जाकर गले में फंदा डाला तथा फंदे को पंखे से बांदा और टेबल पर पैर रखा लेकिन टेबल गिराने से पहले वह पर एक पल के लिए ठीक ऐसा करने से पहले रुका और अपने घर वालों की और खुद ने अपने आने वाली जिंदगी, अपने सपनों को सच करने तथा उनके बारे में सोचने लगा कि यदि मैंने आत्महत्या करी तो जो मैंने अपनी जिंदगी में जो सपने सोचे है उन्हें कौन पूरा करेगा आखिर मैंने जो सपने सोचे उन्हें मैं ही तो सच करूंगा , उन्हें पूरा करने कोई और थोड़ी आएगा तो फिर क्यों मैं यह आत्महत्या का कदम उठाने जा रहा हूं |

वह थोड़ी देर के लिए खुद से बातें करने लगा और कुछ (सकारात्मक) पॉजिटिव विचार उसने खुद से साझा किए की “आयुष तू कब तक यूं ही इन किताबों में उलझा रहेगा क्या गारंटी है कि इन को पढ़ने के बाद तेरी नौकरी लग जाएगी हां ठीक है पढ़ने पर नौकरी लगेगी लेकिन तुझसे अधिक पढ़ा भी तो नहीं जाता इसको तेरा आलस्य कहे या पढ़ाई के प्रति तेरी कम रुचि जो भी हो तू नौकरी किस स्तर की लग पाएगा उससे कितना पैसा कमा पाएगा क्या उससे अपने सपनों को सच कर पाएगा या फिर नौकरी के बाद एक परिवार बसा कर उसमें लग जाएगा जैसा भी हो तुझे पढ़ाई के साथ-साथ कुछ अलग करना है ताकि कुछ अलग पहचान बना सके और हमेशा इस जिंदगी को खुशी से जीना है क्योंकि जिंदगी एक बार मिलती है और वैसे भी आज नहीं तो कल,, कल नहीं तो परसों तू नौकरी भी जरूर लगेगा और इसके साथ कुछ अच्छा भी करेगा और अपने सपनों को साकार करेगा फिर तू क्यों आज बेवजह चिंता करता है आखिर क्यों आत्महत्या करने जा रहा है क्या जिंदगी से डर रहा है,, नहीं ¡तो तू आत्महत्या (sucide) नहीं करेगा तुझे अभी तो यह जिंदगी जीनी है, हां Ayush तुझे जिंदगी जीनी है |.

THE LOVE STORY

वह इन सकारात्मक विचारों को साथ लेकर वापस अपने कदम पीछे ले लेता है तथा कमरे से बाहर आ जाता है और इन्हीं विचारों के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करता है और उसके बाद पढ़ाई के साथ साथ घर पर अपनी एक वेबसाइट तैयार करता है और उसमें थोड़ा पढ़ाई से समय निकाल कर कुछ ऐसी कहानियां कुछ ऐसे ब्लॉग्स लिखना शुरू करता है जो लोगों को सकारात्मक संदेश दें उन्हें एक नई उड़ान दे ताकि यह लोग आत्महत्या करना जैसा कदम नहीं उठाएं और धीरे-धीरे उसकी वेबसाइट लोगों में अपनी एक नई पहचान बना लेती है| इसके साथ वह सरकारी नौकरी भी लग जाता है, वह भी एक अच्छे पद पर और “अब वह जब कभी भी अपने उस दिन को याद करता है जिस दिन उसने आत्महत्या करने जैसे कदम उठाने का विचार किया था और सोचता है यदि मैं उस दिन आत्महत्या कर लेता तो आज मेरे सपनों को कौन उड़ान देता, कौन मेरी जगह आज इस जिंदगी को जी रहा होता मैं धन्यवाद करना चाहता हूं भगवान को जिसने मुझे उस वक्त पर एक सकारात्मक (positive) संदेश दिया और सकारात्मक( positive) विचार मेरे मन मैं आए| उसके बाद से लेकर आज तक मैंने हमेशा कभी भी नेगेटिव नहीं सोचा |सिर्फ और सिर्फ सोचा है तो”( पॉजिटिव ) सकारात्मक” क्योंकि जिंदगी की उड़ान मैं तभी भर पाया और अपने सपने सच करें “|

आज वे लोग जो उसकी आलोचना करते थे उसकी प्रशंसा करने लगे करते हैं और कहते हैं कि आदमी हो तो Ayush जैसा |

SUCCESSFUL AYUSH

दोस्तों मैं आप लोगों को यही कहना चाहूंगा कि यदि आपको अपनी जिंदगी में कुछ नया करना है,, कुछ बदलाव लाना है तो आप कुछ मत करो सिर्फ एक छोटा सा काम करो जो बहुत ही आसान है और वह है. ” सिर्फ और सिर्फ सकारात्मक( पॉजिटिव) विचार “. | हां दोस्तों अपनी जिंदगी में यदि आप एक पॉजिटिव विचार रखोगे और कभी नेगेटिव नहीं सोचोगे तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आप भी अपनी जिंदगी में Ayush की तरह बहुत कुछ कर पाओगे और अपने सपनों को सच कर पाओगे|

thanks of all you for read this story & I wish of all you keep always POSITIVE thoughts… … By sonu mahar

A SAD SONG